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गडकरी ने कहा कि फिलहाल दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश भारत को तीसरे स्थान पर पहुंचने के लिए अपना आयात घटाने और निर्यात को बढ़ाने की जरूरत होगी।
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हालांकि, आंकड़ों के मुताबिक, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों और ‘बिजली, गैस, जल आपूर्ति और अन्य जन केंद्रित सेवा’ क्षेत्रों में चालू वित्त वर्ष के दौरान वृद्धि अपेक्षाकृत मध्यम रहने का अनुमान है।
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सिर्फ एक कैलेंडर वर्ष में ही भारतीय उपभोक्ता का नजरिया बदल गया है जो अब यह नहीं सोचता की ‘क्या यह पहुंचेगा?’, बल्कि अब वह यह सोचता है कि यह ‘कितने मिनट में पहुंचेगा?’। वर्ष के अंत के साथ उपलब्ध आंकड़े दिखाते हैं कि यह क्षेत्र बेहद तेज रफ्तार में आगे बढ़ रहा है।
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सीगल इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक रामनीक सहगल ने कहा, ‘‘ इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड हाईवे, मध्य प्रदेश के लिए एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना है। हम सुरक्षा, टिकाऊपन और समय पर निष्पादन पर ध्यान केंद्रित करते हुए इस परियोजना को पूरा करने के लिए तत्पर हैं।’’
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सूत्रों ने बताया कि अगले साल कंपनी मानवरहित और स्वायत्त प्रणालियों, उन्नत निर्देशित हथियारों, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई आधारित बहुक्षेत्रीय अभियानों तथा रखरखाव, मरम्मत और प्रशिक्षण अवसंरचना के विस्तार में निवेश करेगी।
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शीर्ष 10 में शामिल कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो और भारतीय जीवन बीमा निगम के बाजार पूंजीकरण में गिरावट आई। दूसरी ओर एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल और इंफोसिस लाभ में रहे।
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नांगिया ग्लोबल के अप्रत्यक्ष कर साझेदार राहुल शेखर ने कहा कि सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के संपूर्ण डिजिटलीकरण पर जोर दिया जाना चाहिए जिसमें दस्तावेजीकरण में एकरूपता, पूर्वानुमानित वर्गीकरण पद्धतियां और जोखिम-आधारित त्वरित मंजूरी शामिल हैं जिससे व्यापार सुगमता एवं निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।
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ईवाई इंडिया के उपभोक्ता उत्पाद एवं खुदरा क्षेत्र के राष्ट्रीय प्रमुख परेश पारेख ने कहा कि उद्योग लंबे समय तक ‘मूल्य-केंद्रित वृद्धि’ से ‘मात्रा-चालित’ पुनर्प्राप्ति की शुरुआती अवस्था में प्रवेश कर रहा है। 2026 आशाजनक दिखाई देता है।
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कंपनी ने हालांकि जनवरी से कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा पहले ही कर दी है, लेकिन अय्यर ने कहा कि ‘‘ भारी मूल्यह्रास की भरपाई के लिए ’’ बाद में और भी बढ़ोतरी की जाएगी।
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यह तेजी हालांकि पूरे वर्ष समान नहीं रही। बाजार की अस्थिरता, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की कमजोर भागीदारी और भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच पहले सात महीनों में प्राथमिक बाजार की गतिविधि सुस्त बनी रही। अगस्त से परिस्थितियों में काफी हद तक सुधार आया क्योंकि वृहद आर्थिक चिंताएं कम हुईं, नकदी मजबूत हुई और शेयर बाजार स्थिर हुए जिससे कंपनियों के सूचीबद्ध होने की प्रक्रिया तेज हुई।